आदमी जो कुछ भी करता है वह समज कर करता है, विचारो के बारे में एसा कहा गया हे कि आदमी वैसा ही बनता है जैसा वह सोचता है। सकारात्मक सोच के बारे में बहुत बाते हो गई है। चाहे जैसा भी सकारात्मक सोच रखने वाला आदमी हो फिर भी उसे हमेशा उसके दिमाग में सकारात्मक सोच ही आए एसा मुमकिन नही है। नकारात्मक सोच भी कभी-कभी आ सकते है। समजदार व्यक्ति वह है जो यह Overthinking नकारात्मक सोच को अपने उपर हावी नही होने देता।
डिप्रेशन के बारे में यह बात सामने आइ हे कि हताशा का सबसे बडा कारण दिमाग में चलने वाले हदसे ज्यादा विचार है। हर एक के जिवन में कोइ न कोइ घटना बनती रहती है। कुछ अच्छे होते है तो कुछ खराब, कभी कभी सहन न हो सके वैसी भी घटना बनती रहती है। हर एक व्यक्ति के साथ होनेवाली घटना को हर एक व्यक्ति आसानी से संभाल नही सकता और एसे विचार आते है कि मेरे साथ ही क्युं एसा हुआ? मेरा क्या कसुर था? धीमे-धीमे नकारात्मक विचार बढते चले जाते है। मेरा नसीब ही खराब है, सबको मे ही दिखाता हुं। सब मेरे पीछे पड गए है।
हताशा एक दम से नही आती है। यह अंधेरा एसा है जिसे व्यक्ति गलत और फुजुल विचार करते करते बनाता है। खुद के आसपास धीरे धीरे एसा जाल बनाता है कि वह खुद ही उस जाल से बहार निकल नहीं पाता है।
मानसिक स्वास्थय के लिए यह जरूरी है कि किसी भी विषय को लेकर एक हद से ज्यादा सोचना नही चाहिए। क्युंकि जिंदगी है कुछ न अच्छा लगे वैसा होना ही है। कभी-कभी कोई धोखा देनेवाला ही है, कभी कभी कोइ आपको परेशान करने ही वाला है। कभी कभी अच्छी अच्छी बाते करके कोइ आपको लुभानेवाला ही है। सिर्फ आपके साथ ही एसा हुआ है एसा बिलकुल भी नही है। हर एक व्यक्ति के साथ कभी न कभी एसा हुआ ही है। कभी कुछ गुनाह न करने के बावजुद भी आपके साथ यह सब हो सकता है। इसके इलावा भी जिंदगी की कोइ भी समस्या हो हद से ज्यादा विचारो से बचना चाहिए। जिंदगी मे कुछ बातो को गांठ बांध लेना चाहिए।
एक बात यह है कि, हमने अपने सपने मे भी नही सोचा होगा एसा भी कभी कभी अपने साथ हो सकता है। चाहे जितनी भी महेनत कि हो, तैयारीया कि हो फिर भी ना-कामयाबी का सामना होता ही है। हमने आंखे बंद करके भी किसी व्यक्ति पर भरोसा किया हो वह व्यक्ति भी धोखा दे सकता है।
जिंदगी का दुसरा नाम ही अनिष्चितता है।
समज, बुध्धि और ज्ञान मतलब विरुध्ध परिस्थिति में भी खडे रहेने कि क्षमता। कभी कभी अपने विचारो को खुद से जुदा करना भी आना चाहिए। जब विचारो को हम अपने से अलग नही होने देते तब यही विचार हमसे लगे हुए रहते है और एक समय एसा भी आता है कि यही विचार हमको एसे जकड लेते है कि उससे हमको छुटकारा ही नही मिलता।
कोई निर्णय लेना हो तब भी एक हद से ज्यादा कभी सोचना नही चाहिए। सकारात्मक और नकारात्मक पोइन्ट समज के जितना जलदी हो उतना जलदी निर्णय ले के उस विचार पर हमेशा के लिए पुर्ण विराम रख देना चाहिए। जब तक एक विचार से हमे मुक्ति नही मिलती तब तक दुसरे अच्छे और ताजा विचार आने वाले नही है। नए विचारो को भी आने देने के लिए एक जगह चाहिए।
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ओवरथिंकिंग का इलाज
वर्तमान में जीना सीखें
व्यक्ति हमेशा या तो भविष्य मे जिता है या फिर भुतकाल में ही जिता रहता है। भुतकाल मे जो भी घटना हमारे साथ हो चुकी है उससे बचना बहुत जरूरी है। जो हु चुका है वह हो चुका है, उसको पकड के रखना और बार-बार उसके बारे में सोचने का कोइ मतलब नही है। हम सब भुतकाल के इतने सारे विचार पकड के चलते फिरते है कि वर्तमान में अच्छी तरह से जी ही नही सकते।
भुतकाल में जैसे तैसे छुटकारा मिलता है वहा भविष्यकाल कि चिंताए हमे पकड लेती है। अब में क्या करुंगा? मेरी जिंदगी कैसे गुजरेगी? भविष्य की चिंता व्यक्ति में काल्पनिक भय पैदा करती है, एसे होगा तो वैसे होगा और वैसे होगा तो न होने का हो जाएगा, एसे विचारो में व्यक्ति एसा खो जाता है कि फिर खुद को ही मिलता नही है।
क्या होगा इसके चलते जो होगा वह देखा जाएगा एसा सोचने वाला व्यक्ति हमेशा अपनी जिंदगी अच्छे से जिता है।
ओवरथिंकिंग से बचने का एक उपाय यह भी है कि जो हे आप उसको स्विकार लो। accept kar lo
जो परिस्थिति आपके सामने खडी हुई है क्या आपके हाथ मे कुछ है? हम कुछ करे शके एसा कुछ है? जब इनका जवाब ना है तब फालतु में परेशान होने की जरूरत नही है। कभी कबार हमारा समय हमारे सामने कुछ एसी परिस्थितिया लाके खडा कर देता है जिसमे हम कुछ भी नही कर सकते। चाहे जितना भी शक्तिशाली व्यक्ति हो कभी कभी वह भी मजबुर और लाचार हो जाता है। एसे वक्त में हमे शांत रहना चाहिए और समय को बितने देना चाहिए। जब कभी भी कुछ भी चिज समज में न आए तब शांत होके समय को बितने देना चाहिए। कितने ही सवालो के जवाब और समस्याओ का हल समय खुद ही दे देता है।
व्यक्ति को एक समस्या यह है कि वह सब कुछ अपने कंट्रोल में रखना चाहता है।
जिंदगी में कितना ही कुछ एसा होने वाला है जिसको कोई भी व्यक्ति रोक सकने वाला नही है। नियति या नसीब में मानीये या न मानीये, जिंदगी में एसी परिस्थिति आती ही है जिसमे हम सिर्फ उस खेल को देखने के इलावा कुछ भी नही कर सकते। उस वक्त सिर्फ खेल को देखते रहिए। इन सारी बातो के बीच एक महत्वपुर्ण बात तो यह है कि चाहे कुछ भी हो जाए खुद पर से विश्वास कभी भी कम नही होनी चाहिए। कुछ भी हो जाए मे सब कुछ ठिक कर लुंगा, मुझमें वह ताकत है।
ज्यादातर लोग खुद ही पानी में बैठ जाते है। सब कुछ खतम हो चुका है, अब मै कुछ भी कर नही सकता, एसा विचार कभी भी न करे। कोइ भी नुकसान जिंदगी से ज्यादा नही होता। वह बात हमेशा याद रखे “जान है तो जहां है।“ जिंदगी स्वस्थ होगी दिमाग ठिक होगा तो सारे रास्ते निकल जाएगें। खराब परिस्थितियो में जितना भी हो सके अच्छी तरह से रहने की कोशीश करनी चाहिए। इसका उलट व्यक्ति परिस्थिति बिगडे इस तरह से ही जिता है। जब कभी भी कोइ समस्या हो तो आपके पास की कोइ भी व्यक्ति से दिल खोलके बात करे।
कोइ भी व्यक्ति खुद की कोइ बात किसी को बताना नही चाहता। dil ki baat batao
दिल के अंदर इतना भार दबाके रखा हुआ होता है कि उस भार की वजह से एक दिन खुद वह भी दब के रह जाता है। भरोसेमंद हो एसे मित्र से स्वजन से अपनी समस्या के बारें मे बात करे, फिर भले ही वह मदद ना कर सके, परंतु आप बात कर लेंगे तो थोडी-सी राहत जरूर आपको मीलेगीं। विचारो का अवलोकन करिए। विचारो के उपर विचार करे। मुझे उलटे, फालतु, डरावने और मुझे ही रोकते हो एसे विचार तो नही आते ने? जो एसे विचार आते हो तो उसे दुसरी दिशा में भेज दो। जिंदगी में चाहे कुछ भी हो जाए रिलेक्स रहे। सोंचे के जो भी हो जाए, जो होना हो वह हो जाए परंतु में खुद की जात को टुटने नही दुंगा। जो भी परिस्थिति है मे उसे ठिक करके ही रहुंगा। कुछ भी रुकने वाला नही है। बस खुद कभी भी रुकना नहीं।
