काम करते वक्त जो लोग बार-बार घडी देखते है वह व्यकित अपनी जिंदगी मे कभी भी आगे नही आ सकते। काम करते वक्त जो आपको एसा लगता है कि इस जगह पर तो मेरा शोषण हो रहा है तब तो आपको दुसरी नोकरी ढुंढ ही लेनी चाहिए। कोइ कहेगा आजकल नोकरीया मिलती है कहा? तब उनको कुदतर का शुक्रिया करना चाहिए कि आपको यह नोकरी मीली है। अब किसी भी तरह की फरियाद करे बगैर काम किया करे। यह आर्टिकल में Kam Me Man Na Lagna के कारण बताए गए है। जिससे आप अपने कार्य करने में बिना किसी फरियाद के काम में लगे जाए।
नोकरी भी करनी है और उस नोकरी को गाली भी देनी है एसी मानसिकता व्यक्ति को कभी भी आगे नही आने देती। आपका काम आपको अच्छा नही लगता हो, कम पगार मे ज्यादा काम करना पड रहा है या एसी कोइ भी परेशानी हो तब आपको वह काम छोड देना चाहिए और आपके पसंद का कोइ भी काम कर लेना चाहिए। अगर मजबुरी से वह काम करना पड रहा है तब आपको स्विकार कर लेना चाहिए कि यह मजबुरी है और इसके इलावा कोइ भी चारा नही है।
क्युं कोई भी चारा नही है? क्युंकी आपको महिना पुरा होते ही पगार मील जाता है। उस पगार मे से आप अपने लिए और अपने परिवार के लिए रोटी, कपडा और मकान की जरूरीयात को पुरा कर सकते हो। आपके बच्चो को पढा सकते हो। अपने मा-बाप के स्वास्थ्य के लिए खर्च कर सकते हो। अपने सपनो को साकार करने के लिए बचत कर सकते हो। साल मे मोज-शोख भी कर सकते हो। जो काम के चलते आपको शिकायत है वह काम करके आप यह सब कर सकते हो और अगर नही कर सकते तो ज्यादा कमाई करने के लिए कुछ दुसरा काम ढुंढ लिजिए।
ज्यादा कमाइ करनी हो तो काम करने के घंटे बढाके नइ नई जिम्मेदारीया लेते शीखना पडेगा। नइ नइ स्कील शीखने के लिए तालीम लेनी पडेगी। आपके ओफिस के दुसरे कर्मचारी मे से कोइ काम नही करता पुरा दिन मोबाइल पर चिपका रहेता है एसा सोचने के कारण भी आप अपने काम के प्रति गेर जिम्मेदार हो जाते है। एसी सोच के चलते आपका काम भी बहुत खराब होता है और आप नेगेटिव होते चले जाते हो।
काम करने के घंटे बढाने से स्नेहीजनो के साथे आराम से मजाक मस्करी करने का वक्त मील ही जाता है। सामाजिक जिम्मेदारीया निभाने का भी वक्त मील ही जाता है। परंतु मा-बाप और अपने बच्चो के लिए वक्त निकालने कि वजह से काम करने के घंटे नही बढा सकते एसा कहना फिजुल है।
सच तो यह है कि ज्यादातर किस्म के लोगो को काम न करने का बहाना चाहिए। आज यह बहाना तो कल और बहाना जिसकी वजह से जिंदगी मे मुश्केलीया बढती चली जाती है। तब इन्सान अपने आपको नही पर जिंदगी देने वाले उस कुदरत को देता है। एसे लोग अपनी जिंदगी में हमेशा परेशान ही रहेंगे।
ओफिस में अपनी हाजरी पुराके टेबल पर बैठके फाइलो के इधर-उधर करने वाले लोग भी देखने मे आते है। पर यह दिखावा करने वाले लोगो को आसपास के लोग बहुत ही आसानी से पहचानते है। आपके काम करने की गुणवत्ता कैसी है यह बहुत ही महत्वपुर्ण है। पर आप यह कह कर छुट जाए कि जो काम दुसरे लोग ८ घंटे मे करते है वह काम मे अकेला ४ घंटे मे कर देता हुं और लोग मेरी तारीफ करे तो आप गलत है। हा अगर आप उस बचे हुए ४ घंटे मे कुछ एसा करते है जिससे की आपके अंंदर कुछ अच्छी गुणवत्ता आए, आप जिस भी क्षेत्र मे कम करते हो उसमे बढोतरी मीले और अंत मे आपको नोकरी पर रखने वाली कंपनीको मुनाफा हो तब कह सकते है कि आपने कुछ बहेतर काम किया है। आप ८ घंटे काम करिए १२ घंटे काम करिए या १८ घंटे काम करिए पर यह सारा समय पुर्ण रूपसे गुणवत्ता से परी पुर्ण होना चाहिए।
जिंदगी में कई बार एसा भी होता है कि पुरे मन से दिल लगाकर भी काम किया हो पर उसका परिणाम जैसा चाहिए वैसा मिलता नही है, कभी कभी तो उसका नेगेटिव परिणाम भी मिलता है। आपने देखा होगा कि क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंडुलकर भी कभी कभी जिरो पर आउट हो जाते थे। पर एसे वक्त जो काम करने वाले लोग हे वह तो काम ही करेंगे वह लोग कभी भी निराश नही होते, कभी भी अपना काम नही छोडते। काम करने की उनकी धगश कभी भी कम नही होती।
जिंदगी की जब खतम होने वाली होगी तब आपको क्या याद होगा? यह कि आपने अपनी जिंदगी मे क्या मोज मस्ती की, कहा-कहा घुमने फिरने गए, क्या क्या खाया पीया, किस-किसको मीले यह सब आपको याद नही होगा। जिंदगी मे आपने कैसा और कितना काम किया यह काम के चलते आपको कितनी कामयाबी मीली, आप अपनी जिंदगी मे क्या-क्या सामिल कर सके यही सब आपको याद आएगा। अगर आप अपने परिवार के लिए, मा-बाप के लिए, इस समाज के लिए कुछ किया तब तो अच्छा है, हा अगर नहीं करेंगे तब यह सब जिम्मेदारीया आपकी जगह कोइ और कर लेगा क्युंकी यहा इस दुनिया मे आपके बिना किसीका भी कुछ भी काम रूकने वाला नहीं है।
कम घंटे काम करने के बहाने न बनाइए और अपने काम के प्रति पुरी निष्ठा और लगन के साथ उसको जिंदगी के आखरी सांस तक इमानदारी से करते रहिए इसीमे आपका और दुसरो का भी भला है।
